Sunday, September 30, 2007

हिन्दी scrambling game

Bild 142आपने बचपन में अंग्रेज़ी की scrambling game तो ज़रूर खेली होगी जिसमें सभी अक्षरों के अलग अलग ब्लॉक होते हैं, जिन्हें जोड़कर शब्द बनाए जाते हैं। इससे भाषा में रुची पैदा होती है और अधिक शब्द याद होने लगते हैं। मन में विचार आया कि क्या ऐसा खेल हिन्दी (यानि देवनागरी) के लिए संभव है। प्रयोग करने के लिए अनेक अक्षर बड़े बड़े प्रिंट करके, काट कर, खेलने की कोशिश की, जैसा कि आप ऊपर फ़ोटो में देख रहे हैं (बड़ा करने के लिए फ़ोटो पर क्लिक करें)। लेकिन काफ़ी मुश्किल काम लग रहा है, क्योंकि देवनागरी रोमन की तरह सीधी सपाट तो हैं नहीं कि केवल अक्षरों से काम चल गया। यहाँ हर अक्षर के साथ मात्राएं लगती हैं, फिर ऊपर से आधे अक्षर भी उपयोग होते हैं। अगर हर तरह की संभावना लेकर चलने लगें तो कम से कम पाँच छह सौ ब्लॉक बनेंगे। कोई सुझाव? इस खेल से बच्चों को हिन्दी सिखाने में बहुत आसानी होगी।

Sunday, September 09, 2007

जलयोग या अज्ञान?

जब रमाशंकर जी ने किसी के पानी में खड़े होने, चलने की बात बताई तो मैं चकरा गया। तीन चार सैकंड में न जाने क्या क्या विचार दिमाग में कौंध गए। सोचा शायद पानी को शायद नीचे से थोड़ा जमाया गया होगा या कुछ और। लेकिन जब फ़ोटो देखी तो जनाब पूरे पानी के अंदर थे, नाक और मूँह को छोड़ कर। मैंने माथा पीट लिया। सोचा था ये पानी 'पर' चलेंगे, लेकिन ये पानी 'में' चल रहे हैं। जब नाक और मूँह ही बाहर हैं तो मतलब साँस तो अंदर है ही। जब साँस अंदर है तो आप पूरे नहीं डूब सकते। कम से कम आपका सर या उसका कुछ हिस्सा बाहर रहेगा। लेकिन जभी आप साँस फूलने पर छोड़ोगे, आप डूबने लगोगे। तो अभ्यास केवल इस बात का है कि आप कितनी तेज़ी से साँस छोडकर दोबारा ले सकते हो कि आप पूरे पानी में न जाओ, बिना हाथ पैर हिलाए। और इस तैराकी के पहले अध्याय को प्राचीन भारतीय पद्धति का नाम देकर 'आजतक' और 'जनमत' पर दिखाया गया है। वाह रे मेरा देश। कुछ सीखने करने की सुविधा नहीं, और फिर छोटे मोटे करतब दिखा कर लोगों का उल्लू खींचो।

युनिकोड ⇒ सभी फ़ॉन्ट

युनिकोड में लिखे हिन्दी लेख को अब किसी भी फ़ॉन्ट में बदला जा सकता है। हालाँकि अभी ये केवल कृतिदेव और अमरउजाला पर ही टेस्ट किया गया है। कोई गल्तिआं हों तो ज़रूर बताएं।
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