- नेटवर्क के उस पार
- मेरी डिस्क तुम्हारे पास है
- आओ चैट करें
- प्रोग्राम्मर नंबर 1
- मेरा नाम डेवेल्पर
- जावा वाले job ले जाएंगे
- हम आपकी मेमरी में रहते हैं
- दो प्रोसेस्सर बारह टर्मिनल
- तेरा कोड चल गया
- हर दिन जो मेल करेगा
- डीबग्गिंग कोई खेल नहीं
- जिस देश में बिल गेट्स रहता है
- राजू बन गया MCSE
- क्लाईंट एक नंबरी प्रोग्राम्मर दस नंबरी
- login करो सजना
- नौकर पीसी का
- 1942 -- A Bug Story
- कहो ना वायरस है
- क्रैश से क्रैश तक
- हां मैंने भी डीबग किया है
- शहीद हैकर सिंह
- पासवर्ड देके देखो
- टर्मिनल अपना लौगिन पराई
- Mr. नेटवर्क लाल
- टर्मिनल सजा के रखना
- हैकर्ज़ का राजा डीबग्गर्ज़ की रानी
- क्योंकि मैं डीबग नहीं करता
- फिर तेरी जावास्क्रिप्ट याद आई
- हैंग तो होना ही था
- पैक-मैन का खिलाड़ी
Saturday, December 31, 2005
आने वाली फ़िल्में
Friday, December 30, 2005
wonderful दूध
नैंसी गांधी द्वारा 1996 में लिखी गई ये दूध पीने को उत्साहित करने वाली एड तो आपने टीवी पर कभी देखी होगी।
दूध दूध दूध
दूध है wonderful पी सकते हो रोज़ glassful
दूध दूध दूध
wonderful दूध, पियो glassful
गर्मी में डालो दूध में ice, दूध बन गया very nice
पियो daily once or twice
मिल जाएगा tasty surprise
दूध दूध दूध
wonderful दूध, पियो glassful
दूध है must in every season
पियो दूध for healthy reason
रहोगे फिर fit and fine
जीयोगे past ninety-nine
दूध दूध दूध
wonderful दूध, पियो glassful
चारों ओर मच गया शोर
Give me more, give me more!
Gimme gimme gimme gimme gimme gimme wonderful दूध
पियो glassful दूध
दूध दूध दूध
दूध है wonderful पी सकते हो रोज़ glassful
दूध दूध दूध
wonderful दूध, पियो glassful
गर्मी में डालो दूध में ice, दूध बन गया very nice
पियो daily once or twice
मिल जाएगा tasty surprise
दूध दूध दूध
wonderful दूध, पियो glassful
दूध है must in every season
पियो दूध for healthy reason
रहोगे फिर fit and fine
जीयोगे past ninety-nine
दूध दूध दूध
wonderful दूध, पियो glassful
चारों ओर मच गया शोर
Give me more, give me more!
Gimme gimme gimme gimme gimme gimme wonderful दूध
पियो glassful दूध
बजाज बल्ब
कभी टीवी में ये विज्ञापण आया करता था।
जब मैं छोटा बच्चा था, बड़ी शरारत करता था
मेरी चोरी पकड़ी जाती, जब रौशन होता बजाज
क्या रंगीन जवानी थी, इक राजा और इक रानी थी
राजा रानी शर्मा जाते, जब रौशनी देता बजाज
अब मैं बिल्कुल बूढ़ा हूं, गोली खाकर जीता हूं
लेकिन आज भी घर के अंदर रौशनी देता बजाज
जब मैं छोटा बच्चा था, बड़ी शरारत करता था
मेरी चोरी पकड़ी जाती, जब रौशन होता बजाज
क्या रंगीन जवानी थी, इक राजा और इक रानी थी
राजा रानी शर्मा जाते, जब रौशनी देता बजाज
अब मैं बिल्कुल बूढ़ा हूं, गोली खाकर जीता हूं
लेकिन आज भी घर के अंदर रौशनी देता बजाज
Monday, December 26, 2005
भारत में voIP
मैं ब्लौग को ब्लौग की तरह कम, एक फ़ोरम अथवा समूह की तरह ज़्यादा इस्तेमाल कर रहा हूं। इसलिए सोचा कि चलो नारद जी का एक गूगल समूह भी बना दिया जाए जहां लोग दूसरे चिट्ठाकारों से कुछ सवाल भी पूछ सकें तथा जवाबों / टिप्पणियों को बराबर जगह मिल सके। नारद जी चाहें तो इसकी फ़ीड भी डाल सकते हैं। मेरे ख़्याल से ये बहुत अच्छा रहेगा। अगर और कोई बेहतर विकल्प हो तो बताएं।
खैर ये पोस्ट मैं 'भारत में voIP' के बारे में पूछने के लिए लिख रहा था। क्या भारत में कोई ऐसा voIP प्रोवाईडर है जो आपको एक भारतिय लोकल नंबर देता हो। इसका फ़ायदा है कि भारत में रहने वाले लोग आपको इस नंबर पर अपनी लैंडलाईन से एक लोकल काल की तरह बात सकते हों और उनके पास कंप्यूटर, इंटरनेट वगैरह होना ज़रूरी न हो। अमेरीका, जर्मनी में तो ऐसे कई प्रोवाईडर हैं। मैंने इस लिंक में दिए गए सारे प्रोवाईडरों के वेबसाईट देखे पर कोई भी ऐसा नहीं जो भारत का एक लोकल नंबर (जैसे कि 011-xxxxxxx) देता हो।
आप यदि इस विषय में ज़्यादा जानते हैं तो क्रुपया लिखें।
खैर ये पोस्ट मैं 'भारत में voIP' के बारे में पूछने के लिए लिख रहा था। क्या भारत में कोई ऐसा voIP प्रोवाईडर है जो आपको एक भारतिय लोकल नंबर देता हो। इसका फ़ायदा है कि भारत में रहने वाले लोग आपको इस नंबर पर अपनी लैंडलाईन से एक लोकल काल की तरह बात सकते हों और उनके पास कंप्यूटर, इंटरनेट वगैरह होना ज़रूरी न हो। अमेरीका, जर्मनी में तो ऐसे कई प्रोवाईडर हैं। मैंने इस लिंक में दिए गए सारे प्रोवाईडरों के वेबसाईट देखे पर कोई भी ऐसा नहीं जो भारत का एक लोकल नंबर (जैसे कि 011-xxxxxxx) देता हो।
आप यदि इस विषय में ज़्यादा जानते हैं तो क्रुपया लिखें।
अपनी दुकान
लीजिए हमने भी अपनी दुकान खोल ही ली है। लेकिन इसका करें क्या। क्या ब्लोगस्पोट के साथ यारी बंद करदें? दिल नहीं करता। क्या नारद जी इस इसकी फ़ीड अपने थैले में डाल पाएंगें?
Sunday, December 11, 2005
डिप सौंग
माथिआस क्योहलर जो सालबान के नाम से जाना जाता है, एक संगीत निर्माता है। जर्मनी के शुरू के दिनों में ही उससे जान पह्चान हो गई थी। 2003 की गर्मियों में एक शाम हम कुछ लोग दरिया के किनारे बार-बे-क्यू कर रहे थे। बातों बातों में एक पुराने भारतिय टीवी विज्ञापण की पंक्तियां याद आईं। मैंने वही पंक्तियां उसी धुन में गाईं तो वह बोला ये तो अच्छा है, चलो इसका गाना बनाएं।
यह विज्ञापण टी बैग्ज़ का था जब ताजमहल ने पहली बार भारतिय बज़ार में टी बैग्ज़ प्रस्तुत किए थे। पंक्तियां इस प्रकार थीं:
dip dip dip, add the sugar
and milk, and its ready to sip
if you need the stronger
dip it in the longer
dip dip dip and its ready to sip
तो सुबह के पांच बज चुके थे। अच्छी खासी बियर शियर पी रखी थी। हम उसके घर गये। उसने कम्प्यूटर पर कोई रिदम बजाया और मैंने दो चार बार ट्राई करके गाना गा दिया। उसने थोड़े जर्मन बोल भी जुड़वा दिए। कुछ दिन में उसने उसके ऊपर काम करके दो तीन मिनट का गाना बना डाला। इसका नामकर्ण भी कर दिया - डिप सौंग।
फिर सोचा कि चलो एक वीडियो बनाते हैं। हम दोनों के पास एक एक वीडियो कैमरा था। तो एक दिन हमने दो तीन घंटे लगाकर उसके घर में, फिर बाहर, फिर पुल पर बिना गाने के कुछ ऊट पटांग हरकतें करके थोड़े क्लिप बनाए। उसने इन्हें काट फ़ाट कर, फिर जोड़ कर गाने की साथ सिंक्रोनाईज़ कर दिया। वीडियो अच्छा बन पड़ा था। आखिर घर में ही घटिया कैमरों के साथ बिना किसी सुविधा के साथ बनाया था। ये देखिए वीडियो।
फिर उसने इसे अपने कुछ दोस्तों को दिखाया जो टीवी क्षेत्र में कार्यरत हैं। उन्हें पसंद आया तो इसे दोबारा थोड़े बेहतर तरीके से बनाने की सोची गई। एक दिन उसी के घर में सब ने सुबह दस बजे से लेकर अगली सुबह तीन बजे तक कई सारे छोटे छोटे सेट बनाए, मेकप किया, गाने के साथ अच्छे कैमरे के साथ दोबारा शूटिंग की। शूटिंग की फ़ोटो देखें। ये अच्छा अनुभव था। हालांकि इसके बाद मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। बच्चे के बाद तो दुनिया ही बदल जाती है। नया वीडियो इस पोस्ट के शुरू में दिए गए लिंक्स में मौजूद है। देखें।
यह विज्ञापण टी बैग्ज़ का था जब ताजमहल ने पहली बार भारतिय बज़ार में टी बैग्ज़ प्रस्तुत किए थे। पंक्तियां इस प्रकार थीं:
dip dip dip, add the sugar
and milk, and its ready to sip
if you need the stronger
dip it in the longer
dip dip dip and its ready to sip
तो सुबह के पांच बज चुके थे। अच्छी खासी बियर शियर पी रखी थी। हम उसके घर गये। उसने कम्प्यूटर पर कोई रिदम बजाया और मैंने दो चार बार ट्राई करके गाना गा दिया। उसने थोड़े जर्मन बोल भी जुड़वा दिए। कुछ दिन में उसने उसके ऊपर काम करके दो तीन मिनट का गाना बना डाला। इसका नामकर्ण भी कर दिया - डिप सौंग।
फिर सोचा कि चलो एक वीडियो बनाते हैं। हम दोनों के पास एक एक वीडियो कैमरा था। तो एक दिन हमने दो तीन घंटे लगाकर उसके घर में, फिर बाहर, फिर पुल पर बिना गाने के कुछ ऊट पटांग हरकतें करके थोड़े क्लिप बनाए। उसने इन्हें काट फ़ाट कर, फिर जोड़ कर गाने की साथ सिंक्रोनाईज़ कर दिया। वीडियो अच्छा बन पड़ा था। आखिर घर में ही घटिया कैमरों के साथ बिना किसी सुविधा के साथ बनाया था। ये देखिए वीडियो।
फिर उसने इसे अपने कुछ दोस्तों को दिखाया जो टीवी क्षेत्र में कार्यरत हैं। उन्हें पसंद आया तो इसे दोबारा थोड़े बेहतर तरीके से बनाने की सोची गई। एक दिन उसी के घर में सब ने सुबह दस बजे से लेकर अगली सुबह तीन बजे तक कई सारे छोटे छोटे सेट बनाए, मेकप किया, गाने के साथ अच्छे कैमरे के साथ दोबारा शूटिंग की। शूटिंग की फ़ोटो देखें। ये अच्छा अनुभव था। हालांकि इसके बाद मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। बच्चे के बाद तो दुनिया ही बदल जाती है। नया वीडियो इस पोस्ट के शुरू में दिए गए लिंक्स में मौजूद है। देखें।
पीएचपी में युनीकोड
मैं थोड़ा पीएचपी पर हाथ मार रहा हूं। क्या आप बता सकते हैं कि किसी पीएचपी फ़ाईल में युनीकोड हिन्दी कैसे दिखाई जाती है। एचटीएमएल में तो कोई मुश्किल नहीं। पीएचपी माईएसक्यूएल में रखा हुआ युनीकोड डाटा तो ठीक दिखाता है लेकिन अगर सीधे ईको कमांड में कुछ हिन्दी लिखो तो कोई कोडिंग एरर दि्खाता है। मैंने गूगलिंग करके देखा तो काफ़ी टेढ़ा मेढ़ा रास्ता मिला जो मेरी समझ से बाहर है (मैं पेशे से प्रोग्राम्मर नहीं हूं)।
आप ही कोई हल बताएं।
आप ही कोई हल बताएं।
वास्तव में हीरो कौन?
राम ने सीता से शादी की
रावण ने सीता का अपहरण किया
हनुमान ने सीता को बचाया
तो वास्तव में हीरो कौन?
संजय दत्त
रावण ने सीता का अपहरण किया
हनुमान ने सीता को बचाया
तो वास्तव में हीरो कौन?
संजय दत्त
Thursday, December 08, 2005
हार्ड डिस्क डीजे कैसे बनें?
अगर आपने हार्ड डिस्क पर बीसियों गीगाबाईट के गाने जमा कर रखे हैं तथा एक अच्छा डीजे बनना चाहते हैं तो आपको चाहिए निम्नलिखित तामझाम
ये शौक मंहगा है लेकिन मज़ेदार है। परन्तु एक घंटे में ही सर पकने लगता है क्योंकि अंधेरे में आपको लगातार स्क्रीन पर आंखें गड़ा के रखनी पड़ती हैं। और कापीराईट का पंगा अलग से। लेकिन तकनीक ने इस तरफ़ भी क्या तरक्की की है, जवाब नहीं। लेकिन अंत में सीडी से डीजे करना ही अच्छा है।
- एक अच्छा लैपटौप (या लेपटोप?)
- अगर आपका सारा डाटा लैपटौप में है, फ़िर तो कोई बात नहीं। लेकिन अगर आपके पास इतने गाने हैं जो एक लैपटौप में समा नहीं पा रहे तो आपको चाहिए एक्सटर्नल हार्ड डिस्क जो लैपटौप के साथ फ़ायरवायर के साथ जुड़ी हो। 'यू एस बी' की गती डीजे के लिए काफ़ी नहीं है।
- दो स्टीरियो आऊटपुट वाला pcmcia साऊंडकार्ड जिसकी latency बहुत कम हो। हार्ड डिस्क डीजे के लिए latency बहुत महत्वपूर्ण है। एक आऊटपुट आपके लिए तथा दूसरी आपकी नाचने वाली जनता के लिए। इससे आप वो सुन सकते हैं जो आप जनता को अभी नहीं सुनाना चाहते। pcmcia श्रेणी में तो शायद यही एक है जो सही तरीके से काम करता है। (कीमत 100 यूरो)।
- दो स्टीरियो आऊटपुट का फ़ायदा तभी है जब आपके पास दो प्लेयरों वाला साफ़्टवेयर हो जो आपके ईशारे पर किसी भी प्लेयर की आवाज़ जनता वाली आऊटपुट को दे सके। ट्रैक्टर से बढ़कर कोई डीजे साफ़्टवेयर नहीं है। हालांकि बहुत महंगा है (175 यूरो), लेकिन डेमो वर्शन ट्राई कीजिए, एक बार में बीस मिनट तक चलता है, मज़ा आ जाएगा।
एक छंटे हुए डीजे की तरह अपनी mp3 फ़ाईलों को हर तरह से नियंत्रित कर सकते हैं। स्टेज पर गाने की किसी भी पंक्ति को फ़टाफ़ट लूप में डाल कर अनन्त समय तक बजा सकते हैं। लूप इतने पर्फ़ेक्ट बनते हैं मानो घंटों बैठकर बनाए गए हों। हर गाने का टेंपो को ये अपने आप ढ़ूंढ़ता है जैसे 120.6 bpm (बीट्स प्रती मिनट). आप अपने मिक्स को आसानी से वेव या एम पी थ्री में एक्सपोर्ट कर सकते हैं। - पांचवी चीज़ चाहिए एक 'यू एस बी' मिडी कीबोर्ड, जिसके द्वारा आप ट्रैक्टर को नियंत्रित करेंगे। यानि एक बटन दबाया तो गाना चला, दूसरा दबाया तो लूप शुरू हुआ, एक नाब घुमाया तो फ़ेड इन हुआ, दुसरा घुमाया तो इफ़ेक्ट बढ़ा इत्यादि।। उदाहरण देखिए (कीमत लगभग 200 यूरो)


ये शौक मंहगा है लेकिन मज़ेदार है। परन्तु एक घंटे में ही सर पकने लगता है क्योंकि अंधेरे में आपको लगातार स्क्रीन पर आंखें गड़ा के रखनी पड़ती हैं। और कापीराईट का पंगा अलग से। लेकिन तकनीक ने इस तरफ़ भी क्या तरक्की की है, जवाब नहीं। लेकिन अंत में सीडी से डीजे करना ही अच्छा है।
mp3 एक्सप्लोरर
डैपी एक्स शायद सबसे अच्छा mp3 एक्सप्लोरर है। इसमें आप
ट्राई कीजिए। एक महीने के लिए मुफ़्त है। मैंने और भी कई ऐसे उत्पाद आजमाए हैं लेकिन ये संभवत उत्तम है।
- कई mp3 फ़ाईलों के id3 टैग एक साथ बदल सकते हैं
- हार्ड डिस्क पर उनके नाम बदल सकते हैं, फ़ाईल के नाम को टाईटल में या टाईटल को फ़ाईल के नाम में प्रिवर्तित कर सकते हैं, वो भी कई फ़ाईलों को एक साथ
- उन्हें किसी भी स्ट्रिंग के साथ एक दम से फ़िल्टर कर सकते हैं जो जल्दी से आपका गाना ढ़ूंढ़ने में मदद करता है। आप नाम, टाईटल, एल्बम, आर्टिस्ट तथा कामेंट को फ़िल्टर कर सकते हैं। उदाहरण के लिए अगर नाम के बाक्स में aam दिया तो आपको फ़टाफ़ट मिलेंगें Humne ik shaam chiraagon se.mp3, Nazarshnas tha kia kaam kar gia wo bhi.mp3, Zindagi Jaam Se.mp3
- एक बटन के साथ आप पूरे टैग को बड़े या छोटे अक्षरों में बदल सकते हैं
- अपने गानों के डाटाबेस को 'एच टी एम एल' में एक्सपोर्ट कर सकते हैं
- समय के साथ कई बार ऐसा होता है कि किसी गाने का लिंक आपके डाटाबेस में दो या अधिक बार होता है, या फ़िर गाना मिटाने के बाद लिंक रह जाता है। ये सब आप एक बटन के साथ ठीक कर सकते हैं।
ट्राई कीजिए। एक महीने के लिए मुफ़्त है। मैंने और भी कई ऐसे उत्पाद आजमाए हैं लेकिन ये संभवत उत्तम है।
Sunday, December 04, 2005
कंप्यूटर पर संगीत - 1
वैसे तो कंप्यूटर पर संगीत बनाने के लिए एक MIDI कीबोर्ड तथा कोई MIDI एडिटिंग साफ़्ट्वेयर काफ़ी है। लेकिन इसमें आप सिर्फ़ वही ध्वनियां इस्तेमाल कर सकते हैं जो आपके 'मिडी कीबोर्ड' में या आपके 'साऊंड कार्ड' में हैं। आम कंप्यूटर में लगे साऊंड कार्ड में 128 स्टैंडर्ड मिडी ध्वनियां होती हैं। तथा आम सस्ते मिडी कम्पेटीबल कीबोर्ड (केसिओ टाईप) में आपको 200-300 ध्वनियां मिल जाएंगी। लेकिन बाद में आपको अपना बनाया हुआ संगीत वापस 'आडियो' फ़ार्मेट में रिकार्ड करना पड़ेगा।
दूसरा विकल्प है 'साफ़्टवेयर सिंथेसाईज़र' इस्तेमाल करने का। इसमें हर ध्वनी आपके कंप्यूटर से ही साफ़्टवेयर के द्वारा बनेगी। इसमें आप लाखों की तादाद में अपनी खुद की ध्वनियां बना सकते हैं और बाद में अपने संगीत को सीधे 'wav' या 'mp3' में एक्सपोर्ट कर सकते हैं। इस विकल्प के चलते आज स्टुडियोज़ में हार्डवेयर सिंथेसाईज़र्ज़ का उपयोग कम हो गया है क्योंकि मार्केट में ऐसे धांसू धांसू सिंथेसाईज़र साफ़्टवेयर आ गए हैं कि गिनती नहीं। लेकिन इस विकल्प लिए बहुत सख़्त ज़रूरत है एक कम latency वाले (<12ms) अच्छे 'साऊंड कार्ड' की जो आम कंप्यूटर की दुकानों पर नहीं बल्कि संगीत की दुकानों पर मिलते हैं। मुम्बई तथा चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी इक्का दुक्क ही ऐसी दुकानें हैं। अमेरीका तथा जर्मनी में तो बहुत कम्पीटीसन है। एक सस्ती से सस्ती उदाहरण देखिए जो मेरे पास है।

इस latency का चक्कर ये है कि कीबोर्ड पर कोई कुंजी दबाने के बाद ध्वनी सुनने में कितना समय लगता है (क्योंकि ये साफ़्टवेयर के द्वारा बनेगी)। अगर ये 12 मिलीसैकण्ड से ज़्यादा है तो आप कोई धुन नहीं बजा पाएंगे क्योंकि आप इसे साथ साथ सुन नहीं सकते। creative कंपनी के मंहगे से मंहगे साऊंड कार्ड इस ज़रूरत को पूरा करने में असक्षम हैं। लैपटौप में लगे साऊंड कार्ड तथा 'आन बोर्ड' साऊंड कार्डों को तो छोड़ ही दीजिए। ये वैसा ही है जैसे रेसिंग गेम खेलने के लिए आपको अच्छे ग्राफ़िक कार्ड की ज़रूरत है।
अगले भाग में इन मिडी कीबोर्ड, साफ़्टवेयर तथा साऊंड कार्ड के बारे में और चर्चा करेंगे।
दूसरा विकल्प है 'साफ़्टवेयर सिंथेसाईज़र' इस्तेमाल करने का। इसमें हर ध्वनी आपके कंप्यूटर से ही साफ़्टवेयर के द्वारा बनेगी। इसमें आप लाखों की तादाद में अपनी खुद की ध्वनियां बना सकते हैं और बाद में अपने संगीत को सीधे 'wav' या 'mp3' में एक्सपोर्ट कर सकते हैं। इस विकल्प के चलते आज स्टुडियोज़ में हार्डवेयर सिंथेसाईज़र्ज़ का उपयोग कम हो गया है क्योंकि मार्केट में ऐसे धांसू धांसू सिंथेसाईज़र साफ़्टवेयर आ गए हैं कि गिनती नहीं। लेकिन इस विकल्प लिए बहुत सख़्त ज़रूरत है एक कम latency वाले (<12ms) अच्छे 'साऊंड कार्ड' की जो आम कंप्यूटर की दुकानों पर नहीं बल्कि संगीत की दुकानों पर मिलते हैं। मुम्बई तथा चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी इक्का दुक्क ही ऐसी दुकानें हैं। अमेरीका तथा जर्मनी में तो बहुत कम्पीटीसन है। एक सस्ती से सस्ती उदाहरण देखिए जो मेरे पास है।

इस latency का चक्कर ये है कि कीबोर्ड पर कोई कुंजी दबाने के बाद ध्वनी सुनने में कितना समय लगता है (क्योंकि ये साफ़्टवेयर के द्वारा बनेगी)। अगर ये 12 मिलीसैकण्ड से ज़्यादा है तो आप कोई धुन नहीं बजा पाएंगे क्योंकि आप इसे साथ साथ सुन नहीं सकते। creative कंपनी के मंहगे से मंहगे साऊंड कार्ड इस ज़रूरत को पूरा करने में असक्षम हैं। लैपटौप में लगे साऊंड कार्ड तथा 'आन बोर्ड' साऊंड कार्डों को तो छोड़ ही दीजिए। ये वैसा ही है जैसे रेसिंग गेम खेलने के लिए आपको अच्छे ग्राफ़िक कार्ड की ज़रूरत है।
अगले भाग में इन मिडी कीबोर्ड, साफ़्टवेयर तथा साऊंड कार्ड के बारे में और चर्चा करेंगे।
Saturday, December 03, 2005
मंगल पांडे
अभी परसों ही 'मंगल पांडे' देखी। बहुत अच्छी लगी। आमिर खान ने बहुत सारे भारतिय तथा अंग्रेज़ अभिनेताओं से बहुत अच्छा काम करवाया है। ब्रिटिश राज की तसवीर किताबों कहानियों से उतनी अच्छी नहीं बन सकती जितनी इस फ़िल्म से बनती है। ये फ़िल्म मेरे हिसाब से वाकई अंतरराष्ट्रिय स्तर की है। हिन्दू समाज में कमियों को भी काफ़ी अच्छे तरीके से दिखाया गया है। ये फ़िल्म 'लगान' से भी काफ़ी बढ़के लगी। आमिर खान न सिर्फ़ अच्छे अभिनेता हैं बल्कि वे इस माध्यम को शिक्षा का माध्यम बनाने में सफ़ल हो रहे हैं जो पहले कभी महसूस नहीं किया गया।
ब्रिटिश राज में भी भारतिय अंग्रेज़ों के लिए काम करते थे, आज भी हम बाहर के देशों में जाकर बाहर की कंपनियों के लिए काम करते हैं। क्या फ़र्क है? कल ही स्वामी जी की शिक्षा पर प्रिविष्टी पढ़ी। उनका शब्द 'सृजनशीलता' मुझे बहुत भा गया है। मुझे भी लगता है कि ये सृजनशीलता खून में ही होती है।
ब्रिटिश राज में भी भारतिय अंग्रेज़ों के लिए काम करते थे, आज भी हम बाहर के देशों में जाकर बाहर की कंपनियों के लिए काम करते हैं। क्या फ़र्क है? कल ही स्वामी जी की शिक्षा पर प्रिविष्टी पढ़ी। उनका शब्द 'सृजनशीलता' मुझे बहुत भा गया है। मुझे भी लगता है कि ये सृजनशीलता खून में ही होती है।
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