अकसर job के लिए साक्षात्कार देते समय ऐसा लगता है कि कंपनी में सब कुछ बहुत बढ़िया है, यहां job लेनी मुश्किल है। पर एक बार job मिलने पर कंपनी की समस्याओं के बारे में पता चलता है। फिर अहसास होता है कि कंपनी कितनी सरकारी, ढीली या badly managed है। ऐसा ही देशों के साथ भी होता है। जर्मनी जैसे देशों के लिए वीज़ा लेना किसी nightmare से कम नहीं। जर्मन भाषा का आना एक शर्त के रूप में अब भयंकर होता जा रहा है। पर एक बार वीज़ा मिल गया तो जर्मनी में आने के बाद यहां की समस्याओं के बारे में पता चलता है। फिर अहसास होता है कि सब उतना हरा नहीं जितना बाहर से दिखता है।
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