Thursday, March 17, 2011
भारतीय ब्रांड से जीने वाले भारत के विरुद्ध
भारतीय भोजन की विदेशों में पैठ है। हर बड़े शहर में कम से कम पचास भारतीय रेस्त्रां होते हैं। सौ तक गिनती भी कोई बड़ी बात नहीं। पर दुख की बात है कि इन रेस्त्रां में काम करने वाले अधिकतर लोग और इनके मालिक या तो हिंदी पढ़ नहीं सकते या पढ़ना नहीं चाहते। उन्हें गैरों की तरह पूछना पड़ता है कि क्या आप हिंदी पढ़ सकते हैं? यहां आम धारणा है कि पंजाबियों को हिंदी पढ़नी नहीं आती, केवल पंजाबी आती है। जबकि मैं खुद पंजाब से हूँ, और हिंदी में पढ़ना तो क्या लिखता भी हूँ। यहां सिख समुदाय पहले काफ़ी बड़ी मात्रा में आया। उनके मनों को यहां नेतागिरी करने वाले लोगों के गुरुद्वारे बना बना कर ऐसा भर दिया है कि वे भारत और हिंदी का तिरस्कार करते हैं, पंजाबी को ही केवल अपनी भाषा मानते हैं। जबकि जीते brand India से हैं। अब लोग स्वीकार करने लगे हैं कि उन्हें हिंदी भी आती है। अबतो थोड़ी थोड़ी यह धारणा बनने लगी है कि अगर हिंदी को अस्वीकार किया तो वे अनपढ़ माने जाएंगे।
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