Friday, February 11, 2011

पटियाला हाउस - बहुत बढ़िया फिल्म

आज सिनेमा में पटियाला हाउस देखी। इस फिल्म में अक्षय कुमार का काम देखकर बहुत खुशी हुई। कमाल का अभिनय किया है उन्होंने। और यह फिल्म team work की बहुत बड़ी मिसाल है। इतने सारे लोग फिल्म में और एक एक व्यक्ति की भूमिका इतनी सधी हुई और अच्छी तरह से लिखी गई। एक एक दृश्य देखकर लगता है कि कहानी बहुत ध्यान से लिखी गई है। दृश्यों में इतनी कसावट है कि क्या कहें। फिल्म का स्तर इतना बड़ा कि हैरानी होती है सोचकर कि यह एक भारतीय फिल्म है। इतना पैसा खर्च करना तो किसी ज़माने में केवल हॉलीवुड की बपौती थी। लेकिन पैसा बहुत सही तरह से लगाया गया है। अक्षय कुमार की ही फिल्म 'ब्लू' की तरह नहीं जिसमें केवल समुद्र, वहेल मछलियां या लारा दत्ता का शरीर दिखाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए। और अक्षय कुमार पर तेज़ गेंदबाज़ की भूमिका बहुत जंची क्योंकि उनका शरीर सचमुच एक खिलाड़ी की तरह दिखता है। दूसरे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ खड़े लगते हैं कि वे उन्हीं में से एक हैं। हर एक दृशय को रोचक के साथ साथ बहुत विश्वस्नीय बनाया गया है। कॉमेडी, गंभीरता, क्षुब्धता, सब साथ साथ चलता है, उन्हीं लोगों के द्वारा, उन्हीं लोगों के बीच। ऋषि कपूर, अनुष्का शर्मा, और बल्कि हर एक छोटे बड़े, भारतीय या विदेशी कलाकार का काम बहुत ही सराहनीय है। अक्षय के छोटे भाई की भूमिका में अरमान किरमानी का अभिनय बहुत गहरा लगा। हालांकि उन्होंने दो चार संवाद ही बोले हैं पर उनकी आंखें कमाल की हैं, बिना कुछ कहे सब कुछ कह देती हैं। तकनीकी तौर पर भी फिल्म की editing, sound, cutting सब बहुत ही कसी हुई है। अफसोस कि इस फिल्म का कोई वेबसाईट नहीं।

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