Tuesday, June 08, 2010

बच्चों को साइकल सिखाने का उत्तम तरीका



यहां छोटे बच्चों को साइकल सिखाने के लिए बिना पैडल के छोटे छोटे साइकलों का चलन है। इसपर बैठकर बच्चा हैंडल संभालता और पैरों से ज़मीन को धकेलता है। एक तरह से वह साइकल पर बैठ कर दौड़ता है। इससे वह बहुत जल्दी संतुलन बनाना सीख जाता है जो शुरु में सबसे महत्वपूर्ण होता है। फिर पैडल वाला साइकल चलाने में उसे ज़रा भी समय नहीं लगता।

मैंने अपनी चार साल की बेटी को भारतीय तरीके से साईकल सिखाने की सोची। यानि मैंने उसे पैडल और स्पोर्ट (दोनों ओर छोटे पहियों) वाला छोटा साइकल लेकर दिया और खुद उसे पकड़ कर साइकल सिखाने लगा। मैं उसे साइकल पर बिठाकर पीछे पकड़ कर दौड़ता रहता, पर उसे साईकल का हैंडल ही सभालना नहीं आ रहा था। साइकल कहां से और कैसे मोड़ना है, वह भी उसे पता नहीं था। जल्द ही मुझे समझ आ गया कि यह तरीका ठीक नहीं। मैंने स्पोर्ट और पैडल निकाल दिए। फिर वह साइकल पर बैठ कर पैर दोनों ओर ज़मीन पर लगा कर चलती। जल्द ही उसे हैंडल संभालना आ गया। धीरे धीरे वह साईकल को बहुत तेज़ भगाने लगी। उसे पैरों से साइकल को रोकना भी भली भांति आ गया था। यानि सब एक सामान्य साइकल चलाने की तरह ही था, केवल पैडल नहीं थे। फिर एक दिन मैंने पैडल लगा दिए तो देखा कि वह एकदम से पैडल भी चलाने लगी, बिना समय लिए। फिर समझ आया इस तरह के साइकल का महत्व।

3 टिप्पणियाँ:

रंजन ने कहा…

हमने आदि को दो पहिये वाली साइकिल दी.. उसमें सपोर्ट के पहिये भी लगे है.. आदि एक दो दिन में ही उसे चलाना सीख गया.... अभी पाँव जमीन तक नहीं पहुचते... जैसे ही थोड़ा बड़ा होगा... सपोर्ट निकाल लेगें... वैसे आदि अभी दो का हुआ है...

संगीता पुरी ने कहा…

समय के साथ साथ बच्‍चो को हर तरह की सुविधा मिल रही है .. वरना हम लोगों के लिए साइकिल सीखना किकतना कठिन हुआ करता था !!

रानीविशाल ने कहा…

Good Idea Sir ji