आज कागज़ का एक और मॉडल बनाया। क्योंकि ऐसे मॉडल बनाना काफ़ी बारीकी का काम है और कागज़ के ऐसे छोटे छोटे टुकड़ों को काटकर, मोड़कर ठीक स्थान पर जोड़ना काफ़ी अभ्यास मांगता है, यह मॉडल अब तक सबसे ठीक बना है। ऊपर छोटी सी चिमनी तो पहली बात ठीक बनी है। खिड़कियों के दरवाज़े भी केवल गोंद से जोड़े हुये हैं, वे घूम नहीं सकते। लेकिन देखने में अच्छे लग रहे हैं। ऐसी चीज़ें बनी तो बच्चों के लिये होती हैं पर खेलते बड़े हैं। साथ पड़ी कॉपी के आकार से मॉडल के आकार का आभास तो हो रहा होगा।
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