Tuesday, December 29, 2009
रॉकेट सिंह - एक उम्दा फ़िल्म
विदेश में रहने के कारण फ़िल्में देखना लगभग छूट गया है। रणबीर कपूर की भी पहली फ़िल्में देख नहीं सका। उन फ़िल्मों की झलक देख कर लगता था कि ये भी एक अंग्रेज़ स्टार पुत्र हैं, जिन्हें गंभीर अभिनय के साथ कुछ लेना देना नहीं है। पर कल अचानक मेरी पत्नी फ़िल्म रॉकेट सिंह देख रही थी, बोली बढ़िया फ़िल्म है। मैं भी साथ बैठ गया। वो सीन चल रहा था जब उसका एक मित्र कहता है कि तुम्हें राजा हरीशचंद्र बनने की क्या ज़रूरत थी? उसके बाद तो मैं हिल नहीं पाया। मैं दंग था कि क्या यह वही रणबीर कपूर है? वह स्टार पुत्र? नहीं। यह तो बहुत बढ़िया अभिनय कर रहा है और बहुत अच्छी भाषा बोल रहा है। बाकी पिछले महीनों में कुछ हिंदी फ़िल्में देख कर यह समझ आ गया है कि अब फ़िल्मों में अभिनय की ईमानदारी, विषय और सुदृढ पटकथा ही सर्वोपरि हो गयी है, बड़ा छोटा और स्टार वटार कुछ नहीं। हमारे आम जीवन में सभी छोटे बड़ों की भूमिका होती है, अब फ़िल्में ठीक इसी तथ्य को चित्रित करने लगी हैं। यह पहली फिल्म थी जिसे देखते हुये मेरा दिल कर रहा था कि फ़िल्म खत्म ही न हो। वाकई अब भारतीय फ़िल्म उद्योग अब सही मायनों में उद्योग बन गया लगता है।
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1 टिप्पणियाँ:
Bilkul aise hi bhaav mere man me bhi aaye the is film ko dekh kar...
Ashcharyjanak prasannta hui yah dekhkar ki jameen se kate is abhineta ne kitna damdaar pradarshan kiya...
Sahi kaha aapne...kahani achchi ho to jagrook darshak ko koi fark nahi padta ki abhineta abhinetri koun hain....
Mujhe bhi yah film bahut hi achchi lagi hai...
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