सरदारः हम्म्म्म....कितने ब्लॉगर थे मीट में?
कालियाः सर जी, काफ़ी सारे थे जी। कुछ ब्लॉगरनियां भी थीं।
सरदारः वाह! अब आएगा मज़ा ब्लॉगिंग का। हम्म्म्म... तो इतने सारे ब्लॉगर, और तुम तीन। फिर भी वापस आ गए, खाली हाथ, बिना एक भी मेम्बर बनाए। क्या सोच कर आए थे.....कि एडमिनिस्ट्रेटर खुस होगा? बहुत सारी टिप्पणी करेगा क्यों? अरे ओ सांभा! कित्ती फ़ीड है हमरे एग्रीगेटर में?
सांभाः सर जी पूरी 1503!
सरदारः सुना! पूरी 1503! और ये फ़ीड इसलिए है कि हज़ारों कोस दूर रात को जब कोई ब्लॉगर पोस्ट लिखने बैठता है तो सोचता है कि बेटा ध्यान से लिख। ध्यान से लिख नहीं तो मंगल सिंह तेरी फ़ीड एग्रीगेटर से हटा देगा। और ये तीन हरामजादे, मंगल सिंह का नाम पूरा इ मिट्टी में मिला दिए। इसकी सजा मिलेगी। बरोबर मिलेगी। अरे ओ सांभा! कित्ती फ़ीड है इन तीनों की हमरे एग्रीगेटर में?
सांभाः सर जी ग्यारह!
सरदारः हम्म्म्म....ब्लॉगर तीन और फ़ीड ग्यारह। बहुत नाइंसाफ़ी है ये। सांभा। दे तो जरा माउस, घुमा तो जरा कीबोर्ड।
क्लिक! क्लिक! क्लिक! क्लिक! क्लिक! क्लिक! क्लिक! क्लिक! क्लिक! क्लिक!
सरदारः अब तेरा क्या होगा कालिया?
कालियाः सर जी। आपके एग्रीगेटर से मुझे बहुत टिप्पणी आती है जी।
सरदारः हम्म्म्म....अब खुद ही टिप्पणी करते बैठ।
क्लिक!
Thursday, March 27, 2008
ब्लॉगरों की शोले
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7 comments:
बहुत खूब!
बढिया है ....:-)
मजेदार!! :)
घबरा गए सरदार.
हा-हा-हा-.... :)
bahut khoob !!
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