पेश है किसी भी भाषा से किसी भी भाषा में अनुवाद करने का जुगाड़ (मात्र लिपियांत्रण नहीं)। वो भी एक एक शब्द करके नहीं बल्कि पूरे के पूरे टेकस्ट का अनुवाद। लेकिन इसकी सफ़लता आप पर निर्भर करती है। आप खुद इसके डाटाबेस में अनुवाद डाल सकते हैं, एडिट कर सकते हैं। आप शब्दों के साथ साथ वाक्याँश भी डाल सकते हैं, जैसे I am going ⇒ मैं जा रहा हूँ। इसका उद्देश्य सौ प्रतिशत सही अनुवाद करना नहीं बल्कि जल्दी से किसी भी बड़े अंग्रेज़ी टेकस्ट को काम चलाऊ हिन्दी में अनुवाद करके देखना है ताकि वो लोग जो अधिक अंग्रेज़ी नहीं पढ़ना चाहते, वो ये देख सकें कि इसमें है क्या। जैसे जैसे डाटाबेस समृद्ध होता जाएगा आप हिन्दी से अंग्रेज़ी में अनुवाद भी कर सकेंगे। इतना ही नहीं, इसमें हिन्दी के इलावा अन्य भारतीय भाषाएं भी दी गई हैं। आप चाहें तो अपनी अन्य भाषा जैसे तमिल, तेलगू, बंगाली, गुजराती, पंजाबी आदि को भी समृद्ध बना सकते हैं। आपके द्वारा जोड़ा गया एक एक शब्द हज़ारों लोगों के काम आएगा। इसके के लिए आपको साईट पर मुफ़्त पंजीकरण करना होगा।
Friday, October 19, 2007
Thursday, October 11, 2007
टिप्पणियों का एग्रीगेटर
काश टिप्पणियों के लिए भी एक अलग से एग्रीगेटर होता तो चिट्ठाकारी में और भी चार चाँद लग जाते। लेकिन अफ़सोस कि ब्लॉगस्पॉट टिप्पणियों के लिए वर्डप्रेस जैसी फ़ीड ही नहीं देता। अब अलग अलग पोस्ट के लिए तो फ़ीड डालने से रहे। अन्यथा दूसरे चिट्ठों पर की गई टिप्पणियों पर नज़र रखनी बहुत मुश्किल है। कई बार तो टिप्पणियां पोस्ट से अधिक रोचक और महत्वपूर्ण होती हैं।
ऐसे ही जब ओर्कुट और ब्लॉगस्पॉट दोनों गूगल के हाथ में हैं तो क्यों नहीं हरेक ओर्कुट समुदाय में एक बना बनाया समुदायिक एग्रीगेटर हो जिसमें इसके सदस्यों की सारी फ़ीड / ब्लॉग फ़ीड दिखाई दें?
पता नहीं गूगल वालों को ये छोटी छोटी बातें क्यों समझ में नहीं आतीं।
Wednesday, October 03, 2007
इंप्रो थिएटर
भारत में हर साल सैंकड़ों फ़िल्में बनती हैं, लेकिन अभिनय की तकनीक पर शायद ही कोई साहित्य उपलब्ध हो। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और Fim and Television Institute of India, Pune के वेबसाईट पर भी कोई महत्वपूर्ण सूचना नहीं है।
यहाँ पर एक चीज़ प्रचलित है जो भारत में कभी नहीं सुनी, इंप्रो थिएटर (impro theatre)। इसमें तीन चार कलाकार स्टेज पर वो करते हैं जो दर्शक उन्हें कहते हैं। जैसे दर्शकों द्वारा दिए गए किसी विषय पर एक दृश्य (scene) बनाना। ज़ाहिर है कि उन्हें स्टेज पर आने से पहले पता ही नहीं होता कि उन्हें करना क्या है, और न ही उन्हें तैयारी के लिए कोई समय दिया जाता है। बस पाँच, चार, तीन, दो, एक गिना जाता है और दृश्य शुरू। एक उदाहरण you tube पर मिला, देखिए। लेकिन जल्द ही मैं खुद कोई अच्छी रिकार्डिंग करके लाऊँगा।
इसमें दर्शक हँस हँस के पागल हो जाते हैं। ये दिखने में जितना आसान और सहज है, करने में उतना ही मुश्किल। इसमें पूरी तरह चौकन्ना रहना पड़ता है, दूसरा क्या कह रहा है, उसपर ध्यान रखकर उसे आगे बढ़ाना होता है, भाषा और दुनिया भर के विषयों पर अच्छी पकड़ रखनी पड़ती है। म्युनिक में भी कई इंप्रो थिएटर समूह हैं, जैसे
http://www.fastfood-theater.de/home.php
http://www.tatwort.de/
फ़ास्ट फ़ूड थिएटर की एक छंटी हुई कलाकार कारेन क्रुग, जो 15 साल से इंप्रो थिएटर कर रही हैं, सिखाती भी हैं। उनके पति ने भारत में 1700 किलोमीटर की पैदल यात्रा की और ये पुस्तक प्रकाशित की। उनके पति कल यहाँ फ़्रांसिसी फ़ोटोग्राफ़र Nicolas Chorier की किताब A Kite's Eye View के जर्मन संस्करण Indien von oben के उद्घाटन समारोह पर मौजूद थे। इस पुस्तक में भारत में कई जगह पर पतंग पर कैमरा लगाकर फ़ोटो दिखाई गई हैं। इस समारोह में ज़ुबिन मेहता भी मौजूद थे।
यहाँ रंगमंच अभ्यास के लिए अनेक खेल अंग्रेज़ी में दिए गए हैं जिन्हें हिन्दी में अनुवादित करने की कोशिश यहाँ की जा रही है।
