विश्व का पहला हिन्दी blah blah blah
मेरी पिछली पोस्ट में अपनी पहली चीज़ों का रट्टा लगाने वाले बेतुके व्यक्ति ने अपने बेतुके ब्लॉग की बेतुकी पोस्ट का लिंक दिया है, जिसमें उसने जमकर हम पर कुढ़न निकाली है, पुरानी बातों को याद किया है, फिर कुढ़ने कुढ़ाने के लिए आमंत्रित किया है। तो ये खेल हमें भी अच्छा लगता है। एक बात साफ़ है कि ये व्यक्ति कुछ सार्थक करने की बजाए कुढ़ने कुढ़ाने में विश्वास रखता है। मेरी समझ में आ रहा है कि केवल काम करने से काम नहीं चलता, मार्किटिंग भी ज़रूरी है और फिर भले ही सेवा के लिए किए गए काम की मार्किटिंग भी क्यों न करनी पड़े। और हम भी देखेंगे कि दोनों खेलों में (कुढ़ने कुढ़ाने का खेल और मार्किटिंग का खेल) में कौन आगे निकलता है। फिलहाल हमने भी जो विश्व के पहले हिन्दी काम किए लेकिन आधिपत्य जताने का प्रयत्न नहीं किया, वो येः
1. विश्व का पहला हिन्दी आनलाईन फ़ॉन्ट परिवर्तक जो इतने सारे फ़ॉन्टों में लिखे लेखों को युनिकोड में बदलता हो, जैसे st01, शुषा, कृतिदेव, अमरउजाला, भास्कर, चाण्कय, सुरेख, वेबदुनिया और दो पंजाबी फ़ॉन्ट।
2. विश्व का पहला हिन्दी युनिकोड से फ़ॉन्ट परिवर्तक जो युनिकोड में लिखे लेखों को किसी फ़ॉन्ट में बदलता हो। अभी यह केवल कृतिदेव फ़ॉन्ट के लिए है लेकिन जल्द ही यह अन्य फ़ॉन्टों के लिए भी काम करेगा। यह इसलिए बनाया गया है क्योंकि छपाई के लिए अभी युनिकोड कारागर सिद्ध नहीं हो पा रहा।
3. विश्व का पहला हिन्दी आनलाईन क्विज़
4. विश्व का पहला आनलाईन हिन्दी फ़ोटो उपकरण जिससे आप बिना कोई ग्राफ़िक साफ़्टवेयर अथवा फ़ॉन्ट अपने कंप्यूटर पर इंस्टाल किए हिन्दी शब्दों को पारदर्शी फ़ोटो (png) में बदल सकते हैं। अभी इसमें कुछ तकनीकी पिराबलम चल रही है, जल्द ही ठीक कर ली जाएगी।
5. विश्व का पहला संगीत आधारित ब्लॉग जिसमें राग वाग, सा रे गा मा वाली भ्रमित करने वाली बातों से ऊपर उठ कर संगीत को सरल शब्दों में समझाने का प्रयास किया गया है और साथ ही संगीत निर्माण से संबंधित स्टुडियो तकनीक पर भी नज़र डाली गई है, हिन्दी में। ये ब्लॉग अभी शैशव अवस्था में है। ऐसा नहीं सोचा था कि इसे ऐसे मार्किट करने की नौबत आएगी।
6. विश्व का पहला हिन्दी ब्लॉग इंटरनेट रेडियो। यह सही अर्थों में रेडियो है क्योंकि इसमें आपको अलग अलग कड़ियों पर क्लिक नहीं करना पड़ता, घर वाले रेडियो की तरह सब कुछ अपने आप चलता रहता है, आपने केवल सुनना है।
7. विश्व की पहली आनलाईन हिन्दी गाना पहेली जिसमें आपको किसी गाने के बीच में चल रहे संगीत का छोटा सा टुकड़ा सुनाया जाएगा और आपको गाना पहचानना है।
8. विश्व का पहला आनलाईन टाईपिंग टूल जिसे आप खुद configure कर सकें। यानि आप अपनी सुविधा अनुसार खुद सेट कर सकते हैं कि कौन सी कुञ्जी के साथ कौन सा अक्षर टाईप होना चाहिए। ये कई भाषाओं के लिए बनाया गया है। क्योंकि मुझे अन्य भाषाएं आती नहीं इसलिए उपयोगकर्ता को खुद configure करने की छूट दी गई है। ये इस टूल को एक कदम आगे बढ़ाकर बनाया गया है। ये टूल पूरी तरह डाटाबेस आधारित है। आप इसे बरतेंगे तो इसका जादू देखेंगे।
इसके इलावा और ढेर सारे प्रयोग जो आप यहाँ देख सकते हैं। इसके ईलावा विश्व का पहला संपूर्ण व्यवसायिक हिन्दी ब्लॉग बनाने का काम चल रहा है।
और ये बता दूँ कि इस कुढ़ने वाले व्यक्ति ने मेरे द्वारा हिन्दी के लिए इतना काम किए जाने के बावजूद आज तक एक शब्द तारीफ़ में नहीं कहा, न कहीं ज़िक्र किया है। और कुढ़न को jusify करने के लिए एक पुरानी बेतुकी बात का हवाला दिया है। जब यह व्यक्ति हिन्दी में हुए इतने बड़े काम को नज़रअंदाज़ कर सकता है, वो भी जो एक हिन्दी ब्लॉगर द्वारा किया गया हो, उसकी तथाकथित विश्व की पहली ब्लॉगज़ीन अथवा पॉडज़ीन की क्या विश्वसनीयता होगी?
मैं यहाँ ये भी बताना चाहता हूँ फ़ॉन्ट परिवर्तक को बनाने के लिए पिछले साल चार महीने बिल्कुल काम नहीं किया। चाहता तो इतने समय में लाखों कमा सकता था। जर्मनी जैसे देश में इतने लंबे समय तक काम न करने और पैसा न कमाने का मतलब शायद आप समझते होंगे। और आप जर्मनी में क्या, भारत में चार महीने बिना काम किए रह कर दिखा दीजिए, वो भी परिवार के साथ। लेकिन ये मेरा हिन्दी का प्यार है और प्यार की कोई कीमत नहीं होती।
Sunday, July 22, 2007
विश्व का पहला हिन्दी blah blah blah
Saturday, July 21, 2007
विश्व की पहली हिन्दी ब्लॉगज़ीन?
हिन्दी चिट्ठाकारी का अभी सारा concept ही नया है। इसमें अभी अधिकतर वो लोग ही जुड़े हुए हैं जो किसी न किसी क्षेत्र में माहिर हैं। उन सभी लोगों ने हिन्दी चिट्ठाकारी को कुछ न कुछ नया दिया है, कोई न कोई काम ऐसा किया है जो पहले नहीं हुआ। किसी ने कोई टूलबार पहले बनाई, किसी ने किसी नए विषय पर पहला चिट्ठा बनाया, किसी ने कोई उपयोगी टूल पहली बार बनाया, किसी ने हिन्दी में पहली बार कोई लोगो बनाया आदि। आम बंदे के बस की बात तो अभी चिट्ठाकारी है नहीं। ऐसे में कैसे लोग बार बार लगातार ढिंढोरा पीट सकते हैं कि फ़लां ने पहली बार चिट्ठा बनाया अथवा विश्व की पहली हिन्दी ब्लॉगज़ीन बनाई? (यहाँ देखें- http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php/Hindi_Blogosphere_Social_Sites_and_Services)
अगर सभी चिट्ठाकार ऐसे अपने अपने कामों का दावा करने लगें तो हिन्दी चिट्ठाकारी अहंकार से भरे हुए लोगों का मैदान बनकर रह जाएगा। वैसे भी क्या 'ब्लॉगज़ीन' कोई साहित्यिक शब्द है? अगर सड़क चलते आदमी से पूछो कि क्या तुमने विश्व की पहली हिन्दी ब्लॉगज़ीन देखी है तो शायद वो आपके सर पर लाठी मार दे। 'पहले प्रधानमंत्री' आदि की बात तो समझ में आती है, लेकिन ये ब्लॉगज़ीन का क्या मतलब है? बिना सोचे समझे, तर्क वितर्क किए जो लोग इस तरह की चीज़ों के पिछलग्गू बने रहते हैं, उन्हें ज़रा इसके बारे में सोचना चाहिए।
ये कौन चिट्ठाकार है
चिट्ठाकारी का मतलब ही ये है कि कोई इंटरनेट में अपने ब्लॉग पर कुछ लिखता है, हम उसे पढ़ते हैं और लिखने वाले के साथ सीधा संपर्क साध सकते हैं। ये पुराने वेबसाईटों की तरह नहीं जहाँ ढेर सारे तकनीक से अनजान लेखकों से लेख इकट्ठे किए होते हैं और उनके नाम को छोड़ कर और कुछ भी नहीं दिया होता। यानि चिट्ठाकारी लेखन का पूर्ण पारदर्शी रूप है जिसके चिट्ठाकार अपने विचार अपने नाम से, बिना किसी बिचौलिए के सीधे जनता तक पहुँचाने में समर्थ होता है। फिर क्यों हिन्दी एग्रीगेटरों में वो चिट्ठे जोड़े जाते हैं जिसमें लेखक ने अपनी पहचान छुपाई होती है। ऐसे में कैसे एक एग्रीगेटर खुद चिट्ठाकारों की आवाज़ बनने का दावा कर सकता है? ऐसे तो वो गुमनाम चिट्ठाकार दुनिया भर से सामग्री चुरा कर भी एग्रीगेटर द्वारा नाम कमा सकता है और उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। क्या ये सही है? इसमें अच्छे बुरे लेखन का सवाल नहीं है। कम से कम ये तो पता चलता ही है लेखक खुद लिख रहा है या कहीं से टोपो मार रहा है। अगर वो हमेशा टोपो जैसी प्रविष्टियां छाप रहा है तो एग्रीगेटर को पूछना चाहिए कि भाई तुम चिट्ठाकारी कर रहे हो या टोपो अखबार चला रहे हो। एग्रीगेटरों और टिप्पणी करने वाले लोगों को इस बारे में सोचना चाहिए कि जिस चिट्ठे को वो देख रहे हैं, उस व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक है या नहीं। या कम से कम क्या वो खुद के बारे में या खुद की रचनाएं लिख रहा है या नहीं।
important unicode characers
ऐसे ही मोहरे याद रखने के लिए ये पोस्ट।
♚, ♔ राजा
♛,♕ रानी
♜,♖ हाथी
♝,♗ ऊंट
♞,♘ घोड़ा
♟,♙ प्यादा
₀ ₁ ₂ ₃ ₄ ₅ ₆ ₇ ₈ ₉ ₊ ₋ ₌
✹ ✆ ❄ ☎ ☏ ☐ ☑ ☒
http://www.rajneesh-mangla.de/char.php?i=7795
http://www.rajneesh-mangla.de/char.php?i=9094
% -> %25
? -> %3f
& -> %26
= -> %3d
+ -> %2b
SPACE -> %20
http://de.selfhtml.org/html/verweise/email.htm
पत्रकारों की ज़रूरत
हमें जर्मनी आधारित ब्लॉग और पत्रिका के लिए बहुत सारी जर्मनी संबंधी हिन्दी सामग्री की आवश्यक्ता है। इसके लिए कुछ बजट तैयार किया गया है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें।
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Friday, July 20, 2007
युनिकोड ⇒ कृतिदेव फ़ॉट
पेज सेटिंग के लिए युनिकोड समर्थित कोई अच्छा सॉफ़्टवेयर उपलब्ध न होने के कारण अभी युनिकोड छपाई के लिए इतना सफ़ल नहीं हो पा रहा है। इस टूल से आप युनिकोड में लिखे लेख को कृतिदेव फ़ॉट में बदल सकते हैं।
यहाँ आप सभी युनिकोड के सभी 65000 से अधिक अक्षर देख सकते हैं। 40000 से अधिक तो चीनी अक्षर हैं।
