इस खेल का उद्देश्य मैं साफ़ तौर पर तो नहीं कह सकता लेकिन मोटे तौर पर यही है कि आपके दिमाग में तुरंत कितनी उपयुक्त चीज़ें और शब्द आ सकते हैं। इसमें सभी सदस्य तीन तीन के समूहों में वितरित हो जाते हैं। एक सदस्य कुछ करने का नाटक करता है, साथ में बोलता है कि वो कौन है और क्या कर रहा है। दूसरे को उससे मिलता जुलता और उस कल्पना को आगे बढ़ाने के लिये कुछ करना होता है, साथ में बोलना होता है कि वो कौन है और वो क्या कर रहा है। तीसरे सदस्य को भी यही करना होता है। फिर पहला सदस्य अन्य दो में से किसी एक को लेकर अलग हो जाता है। बचा हुआ सदस्य अपनी क्रिया और कथन दोहराता है। फिर से दूसरे दोनों सदस्यों को वही खेल आगे बढ़ाना है कुछ नया सोच कर।
उदाहरण के लिये, पहला सदस्य बाल कंघी करने का नाटक करता है, और कहता है, मैं व्यक्ति हूँ और कंघी कर रहा हूँ। तो दूसरा उसके सामने खड़ा हो सकता है और कह सकता है, मैं शीशा हूँ। तीसरा सदस्य पहले सदस्य के सिर के आस पास मंडरा सकता है और कह सकता है, मैं कंघा हूँ। फिर मान लीजिये पहला सदस्य दूसरे (यानि शीशे) को लेकर अलग हो जाता है (ये कहकर कि मैं शीशे को साथ ले रहा हूँ)। फिर तीसरा सदस्य हिल जुल कर दोहराता है कि मैं कंघा हूँ। फिर अन्य दो में से किसी एक को चल रही कंघी से मिलता जुलता कुछ करना है। जैसे वो ये कहकर आगे आ सकता है कि मैं लड़की हूँ और कंघी कर रही हूँ। फिर बचा हुआ सदस्य लड़की के पास आकर बैठ सकता है और कह सकता है कि मैं लड़की का प्रेमी हूँ और उससे प्यार कर रहा हूँ आदि। ये खेल जितनी देर तक चला सकें चलायें, आप इसका आनंद और मुश्किल महसूस करेंगे।
Saturday, December 01, 2007
अभिनय अभ्यास-8--तीन खिलाड़ी
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impro
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