Wednesday, November 21, 2007

अभिनय अभ्यास-5--तस्वीर

इसमें सभी सदस्यों को पाँच या छह सदस्यों के समूहों में बाँट दिया जाता है। हर समूह को बारी बारी से एक कहानी कहनी है जिसका शीर्षक दर्शकों द्वारा दिया जायेगा। इस संदर्भ में दूसरे समूहों के लोग दर्शक हैं जो बैठकर देखेंगे और मज़े लेंगे। दर्शकों में से कोई एक पर्दर्शन करने वाले समूह के सामने बैठ जायेगा और उँगली से एक एक करके पर्दर्शन कर रहे सदस्यों की तरफ़ तेज़ी से इशारे करेगा, लेकिन किसी क्रम में नहीं बल्कि randomly। जिसकी तरफ़ इशारा हुआ, वो अगला शब्द बोलेगा, कुछ इस तरह से उससे कोई वाक्य बनता दिखे। इस तरह on the spot वाक्य बनाये जायेंगे और कहानी गढ़ी जायेगी। पर्दर्शन करने वाले समूह के लोग एक दूसरे से पास पास या जुड़कर ऐसे खड़े हो जायेंगे जैसे फ़ोटो खिंचवा रहे हों ताकि इशारा करने वाला तेज़ी से विभिन्न सदस्यों की तरफ़ इशारा कर सके। एक दो लोग नीचे भी बैठ सकते हैं।

इसमें सदस्यों को बहुत ध्यान से दूसरों द्वारा बोले जाने वाले शब्द सुनने होते हैं ताकि अपनी बारी आने पर (जो कभी भी आ सकती है) वे कोई वाक्य में फ़िट बैठने वाला शब्द बोल सकें। क्योंकि हर कोई अलग अलग तरह से सोचता है तो एकदम से चुनींदा शब्द ढूँढना बहुत मुश्किल होता है, खासकर जब दूसरे शब्द ध्यान से न सुनें जायें। वाक्यों और कहानी के अर्थ भी निकलने चाहिये और अँत में कोई शिक्षा भी बोली जानी चाहिये। इसमें अक्सर काफ़ी हास्यास्पद स्थितियां पैदा हो जाती हैं, उल्टे पुल्टे वाक्य बन जाते हैं। कहानी की तैयारी के लिये समय नहीं दिया जाता, बल्कि शीर्षक देने के बाद पाँच, चार, तीन, दो, एक गिना जाता है और दृश्य शुरू करना होता है। दर्शक कोई भी टेढ़ा मेढ़ा शीर्षक दे सकते हैं जैसे 'बंदर के हाथ में लाल छड़ी'। अब बताइए इस पर क्या कहानी बनायेंगे, वो भी बिना तैयारी के, वो भी एक एक शब्द अलग अलग मूँह से।

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