Wednesday, November 21, 2007

अभिनय अभ्यास-3--काल्पनिक बक्सा

ये खेल मुझे काफ़ी मुश्किल लगता है क्योंकि इसमें काफ़ी कल्पना शक्ति की ज़रूरत पड़ती है। इसमें सभी खिलाड़ियों को दो दो सदस्यों के समूहों में बाँट दिया जाता है। उन्हें अपने अपने साथी को एक काल्पनिक बक्सा खोलकर, उसमें उसमें पड़ी चीज़ें अपने साथी को दिखानी होती हैं। लेकिन बक्सा किस तरह का हो, वह उनका साथी बताता है।

उदाहरण के लिये हम किन्ही दो सदस्यों के समूह की बात करते हैं। दोनों ज़मीन पर चौकड़ी मारकर आमने सामने बैठ जाते हैं। एक खिलाड़ी अपने साथी को कोई theme देता है। मान लीजिए वो कहता है कि तुम एक अध्यापक हो। तो दूसरे खिलाड़ी को एक बक्से की कल्पना करनी होती है जो उसके एक तरफ़ पड़ा है। उसे कल्पना करनी होती है कि एक अध्यापक के बक्से में क्या क्या हो सकता है। फिर उसे हाथों से उस काल्पनिक बक्से को खोलना होता है और एक एक चीज़ निकाल कर अपने साथी को दिखानी होती है, उसकी थोड़ी व्याख्या भी करनी होती है। उसका साथी भी उसकी मदद करता है, खुश होकर, हैरान होकर, चीज़ के बारे में कुछ बोलकर, पूछकर आदि।

मान लीजिए दूसरा सदस्य कहता है, अरे देखो, मेरे बक्से में कितना सुंदर पेन है। वो हाथ ऐसे चलाता है मानो बक्सा खोलकर उसमें से पेन निकाल कर दिखा रहा हो। फिर दूसरा सदस्य इस काल्पनिक कहानी को आगे बढ़ाने के लिये कुछ मदद कर सकता है, मान लीजिये वो कहता है, अरे हाँ, ये तो वाकई बहुत सुंदर पेन है, कितना सुंदर डिज़ाईन है, इसमें तो चार तरह के सिक्के भी हैं, आदि आदि। फिर दूसरा सदस्य कोई दूसरी चीज़ बक्से में से निकालता है, मान लीजिये चॉक का डिब्बा, या कागज़, या कोई पुस्तक आदि। इस खेल का उद्देश्य है कि आप कितनी कल्पना कर सकते हैं और किस हद तक चीज़ों को ऐसे दिखा सकते हैं जैसे वे वाकई आप के हाथों में हों और आप उनसे भली भाँति परिचित हों।

इसमें पाँच सात मिनट में ही बस होने लगती है। अब बंदा क्या क्या सोचे, उसके बारे में जो सामने है ही नहीं, जो दूसरे के द्वारा सुझाया गया है, जिसके बारे में कुछ पता ही नहीं या रुची नहीं। लेकिन आपने अपने मुख पर ऐसे मुस्कान रखनी है जैसे बड़े चाव से दिखा रहे हों, देखो ये, देखो वो आदि आदि।

अध्यापक तो फिर भी आसान है, अगर आपका साथी कह दे कि आप सपेरे हैं, खान में काम करने वाले मज़दूर हैं आदि तो आप क्या करेंगे? सपेरे के बक्से में क्या होगा? एक दो साँप, बीन, शायद बटुआ, रुमाल। लेकिन आप तब तक रुक नहीं सकते जब तक या तो आपका साथी कहदे कि चलो बस, या फिर आपके द्वारा निर्धारित अवधि समाप्त न हो जाये जैसे दस मिनट, पंद्रह मिनट आदि। जब आपकी बस होने लगे तो आपका साथी आपको छेड़ भी सकता है कि अरे अभी खत्म कहाँ हुआ, वो देखो वो साईड में क्या पड़ा हुआ है, लाल लाल, छोटा सा, गोल सा। तो आप फ़ंस गये। आप ये नहीं कह सकते, अबे कुछ नहीं है, बेकार में दिमाग मत चाट। आपको सोचना ही होगा कि एक अध्यापक, ये सपेरे या मज़दूर के बक्से में गोल गोल, लाल रंग की छोटी सी चीज़ क्या हो सकती है। अध्यापक के बक्से में कुछ प्रयोग करने के लिये काँच का बँटा हो सकता है, सपेरे के बक्से में साँपों को अभ्यास करवाने के लिये रबड़ की गेंद हो सकती है, मज़दूर के बक्से में कोई खाने की चीज़ हो सकती है, आदि।

इसमें गल्त ठीक कुछ नहीं होता, सब चलता है। ये केवल आपकी कल्पना शक्ति टेस्ट करने और बढ़ाने के लिये है। इससे मुझे विचार आया कि हम भी टिप्पणियों द्वारा ये खेल खेल सकते हैं। बताईये एक लोहे की खान में काम करने वाले मज़दूर के बक्से में क्या क्या हो सकता है?

1 comments:

आनंद said...

बहुत रोचक खेल है, वाह!