Sunday, November 18, 2007

अभिनय अभ्यास-1

मैं एक दो महीनों से improvisation कोर्स कर रहा हूँ। improvisation के बारे में थोड़ा जानने के लिये मेरी यह पोस्ट पढ़ें। इसमें किसी भी स्थिति में हालात को समझकर, स्वीकार करके उस पर और कुछ जोड़ने की शिक्षा दी जाती है। रंगमंच (theatre) के लिए ये काफ़ी महत्वपूर्ण है, लेकिन आम जीवन में भी ऐसी ट्रेनिंग काफ़ी मददगार है। हालाँकि ये कोर्स मैं जर्मन भाषा में कर रहा हूँ लेकिन मैंने जो कुछ सीखा उसे हिन्दी में पेश करने की कोशिश करूँगा।
improvisation के बारे में पढ़ने अथवा कुछ तथ्य इकट्ठे करने में मेरी रुची नहीं है कि ये क्या है, कहाँ से आयी, कब शुरू हुयी आदि। मेरी रुची बस इसे सीखकर हिन्दी में पेश करने की है, ताकि भारत में लगातार बढ़ रहे टीवी, फ़िल्म व्यवसाय के लिए लोग कुछ तकनीकी बातें सीख सकें। इसमें छोटे छोटे तरह तरह के अभ्यास करवाए जाते हैं।
पहला अभ्यास। मेरी शिक्षिका कहती हैं कि वो लोग इसे हर शो से पहले ज़रूर करते हैं, अपने आपको पूरी तरह चौकन्ना करने लिये, जगाने के लिये। सब लोग एक घेरे में इकट्ठे हो जायें। कोई एक शुरू करने लिये किसी की तरफ़ देखकर ताली बजायेगा, जैसे उसे कोई संदेश दे रहा हो। दूसरा उसे देखकर फिर किसी और की तरफ़ देखेगा और ताली बजायेगा। फिर वो तीसरा व्यक्ति किसी और की तरफ़। आप वापस उसी व्यक्ति को भी संदेश दे सकते हैं जिससे आपने संदेश लिया।

पहले पहले इसके अभ्यास में समय लगता है, खेल धीरे धीरे आगे बढ़ता है क्योंकि लोग चौकन्ने नहीं होते। वो देख नहीं रहे होते कि उन्हें संदेश मिल रहा है। फिर उन्हें समझ नहीं आता कि आगे संदेश किस को दें। कई बार वो किसी की तरफ़ देखते हैं लेकिन ताली बजाते वक्त किसी और की तरफ़ देखने लगते हैं। या फिर ताली बजाने बाद नज़रें किसी और की तरफ़ घुमा लेते हैं। इससे पता नहीं चलता कि संदेश किसे दिया गया है और खेल बहुत धीरे धीरे आगे बढ़ता है। कई बार यूँ होता है कि जिसे हम अच्छी तरह नहीं जानते या फिर जानते हैं लेकिन कुछ भेदभाव है, उसे हम संदेश देने से झिझकते हैं। अभ्यास से ये सब कमियां दूर होती रहती हैं, एक दूसरे में विश्वास बढ़ता जाता है। गति तेज़ होती जाती है, लोग चौकन्ने होते जाते हैं, सीधे खड़े होने लगते हैं। अगर आपको संदेश लेने के लिये हर समय तैयार रहना है तो आपको लगता देखना पड़ेगा कि संदेश किससे किसको जा रहा है। इससे सबकी आँखें लगातार तालियों के साथ तेज़ी से इधर उधर घूमती रहती हैं।

मैं ये सब थोड़ा विस्तार से बताने की कोशिश इसलिये कर रहा हूँ क्योंकि आपको नेट पर कई कगह impro games के बारे में पढ़ने को मिल जायेगा, लेकिन वो इतने संक्षेप में लिखी होती हैं कि पूरी तरह पता नहीं चल पाता कि क्या और कैसे करना है, उसमें मुश्किल अथवा महत्वपूर्ण क्या है।

2 comments:

हर्षवर्धन said...

रजनीशजी
आपकी मेलआईडी खुल नहीं रही है। कृपया मुझे मेलआईडी देंगे।
हर्षवर्धन
harshvt@gmail.com

vimal verma said...

ये काम आपने अच्छा किया है कि सामग्री हिन्दी में उपल्ब्ध करा रहे हैं, वाकई सीखने वालों के लिये बड़ा सार्थक काम आप कर रहे हैं. शुक्रिया