हिन्दी चिट्ठाकारी का अभी सारा concept ही नया है। इसमें अभी अधिकतर वो लोग ही जुड़े हुए हैं जो किसी न किसी क्षेत्र में माहिर हैं। उन सभी लोगों ने हिन्दी चिट्ठाकारी को कुछ न कुछ नया दिया है, कोई न कोई काम ऐसा किया है जो पहले नहीं हुआ। किसी ने कोई टूलबार पहले बनाई, किसी ने किसी नए विषय पर पहला चिट्ठा बनाया, किसी ने कोई उपयोगी टूल पहली बार बनाया, किसी ने हिन्दी में पहली बार कोई लोगो बनाया आदि। आम बंदे के बस की बात तो अभी चिट्ठाकारी है नहीं। ऐसे में कैसे लोग बार बार लगातार ढिंढोरा पीट सकते हैं कि फ़लां ने पहली बार चिट्ठा बनाया अथवा विश्व की पहली हिन्दी ब्लॉगज़ीन बनाई? (यहाँ देखें- http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php/Hindi_Blogosphere_Social_Sites_and_Services)
अगर सभी चिट्ठाकार ऐसे अपने अपने कामों का दावा करने लगें तो हिन्दी चिट्ठाकारी अहंकार से भरे हुए लोगों का मैदान बनकर रह जाएगा। वैसे भी क्या 'ब्लॉगज़ीन' कोई साहित्यिक शब्द है? अगर सड़क चलते आदमी से पूछो कि क्या तुमने विश्व की पहली हिन्दी ब्लॉगज़ीन देखी है तो शायद वो आपके सर पर लाठी मार दे। 'पहले प्रधानमंत्री' आदि की बात तो समझ में आती है, लेकिन ये ब्लॉगज़ीन का क्या मतलब है? बिना सोचे समझे, तर्क वितर्क किए जो लोग इस तरह की चीज़ों के पिछलग्गू बने रहते हैं, उन्हें ज़रा इसके बारे में सोचना चाहिए।
Saturday, July 21, 2007
विश्व की पहली हिन्दी ब्लॉगज़ीन?
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9 comments:
क्या बात है रजनीश भाई!
इसका जवाब मैंने यहाँ दिया है।
आपकी बात से सहमत नहीं। जो आंकड़े तथ्यगत होते हैं उन्हें इतिहास में हमेशा सहेजा जाता है। जरा गूगल पर सर्च कीजिए, पहले वैबपेज के बारे में, पहले ब्लॉग के बारे में, आपको जानकारी मिल जाएगी।
रही बात सर्वज्ञ की तो, उसका संपादक होने के नाते बताना चाहूँगा कि वहाँ केवल तथ्यगत आंकड़े ही रखे जाते हैं, यदि आप कोई नई चीज पहली बार बनाते हैं तो उसके साथ भी 'पहला' शब्द अवश्य लिखा जाएगा।
सर्वज्ञ पर कई जगह आपका नाम तथा आपके टूल्स का जिक्र है तो क्या इसके लिए आपने कोई ढिंढोरा पीटा?
अगर किसी ने कोई काम का औजार या सेवा बनाई है और उसके बारे में जानकारी दी जाती है तो उसके योगदान का जिक्र करने में आपको बुराई क्यों नजर आती है?
वैसे भी क्या 'ब्लॉगज़ीन' कोई साहित्यिक शब्द है? अगर सड़क चलते आदमी से पूछो कि क्या तुमने विश्व की पहली हिन्दी ब्लॉगज़ीन देखी है तो शायद वो आपके सर पर लाठी मार दे।
साहित्यिक शब्द तो 'ब्लॉग' भी नहीं है, नहीं ही 'पॉडकास्ट', 'वॉडकास्ट' वगैरा। सड़क पर चलते आदमी को तो ब्लॉगिंग या चिट्ठाकारी का भी पता नहीं होता, लाठी तो वह इसे पूछने पर भी मार देगा।
रही बात 'ब्लॉगजीन' के मतलब की तो नई चीजें जब आती हैं उनका नामकरण तो होता ही है, जब पहला ब्लॉग बना था तब 'ब्लॉग' शब्द भी अजीब ही लगता होगा लेकिन समय के साथ-साथ ये प्रचलित होता गया।
वैसे 'ब्लॉगिया' शब्द का प्रयोग मेरे विचार से सबसे 'पहले' आपने ही किया था अर्थात आपने ही इसको चलाया और आज हम इसे खूब प्रयोग करते हैं, जरा इसका साहित्यिक मतलब बताएंगे?
बात हजम नहीं हुई. कई लोगो से जब ब्लोग के बारे में पुछता हूँ तो वे भी सर पर लाठी मारने दौड़ते है, मगर आलोकजी ने पहला चिट्ठा बनाया था ऐसा कहा जाता रहेगा.
ये क्या ढेला मार दिया आपने भाई। शब्द तो ऐसे ही जन्मते हैं और चल पड़ते हैं। मुझे तो आपका दिया ब्लागिया शब्द और देबूभाई का ब्लागजी़न।
श्रीश जी, ब्लॉगिया शब्द मैंने प्रयोग किया। इसका कोई साहित्यिक अर्थ नहीं है। लेकिन मैंने कभी भी ब्लॉगिया शब्द पर अधिपत्य नहीं जताया।
सर्वज्ञ पर कई जगह आपका नाम तथा आपके टूल्स का जिक्र है तो क्या इसके लिए आपने कोई ढिंढोरा पीटा?
आप क्या कहना चाहते हैं? समझा नहीं। क्या आपने सर्वज्ञ पर कहीं भी यह लिखा है कि ये टूल 'पहली बार' मैंने बनाया?
नई चीज़ों का नामकरण तो होता है लेकिन साथ ही आप ये भी कहना शुरू करदें कि ये नई चीज़ पहली बार फ़लां ने बनाई, तो ये हिन्दी चिट्ठाकारी के लिए अभी अतिश्योक्ति है। बाकी क्या ब्लॉगज़ीन शब्द का अर्थ कहीं समझाया गया है?
समझाया नहीं बताया गया है, यहाँ पर और कीचड़ उछालने के पहले पढ़ना चाहिये था।
पढ़ने की ज़रूरत नहीं। ये नहीं कि आप अपने साईट पर कुछ भी डालें और आशा करें कि लोग उसे पढ़ें भी, स्वीकारें भी, बिना किसी तर्क के। इसे किसी सार्वजनिक स्थान पर विचार विमर्श, तर्क वितर्क और वोटिंग के साथ परिभाषित किया जाना चाहिए।
bhaiye tumhein itni taqleef ho rahi hai to tum bhi kisi cheej mein pratahm aa jao. tumhein kisne roka hai, bana do kuchh naya aur kah do ki tum sarvapratham ho. jise maanna ha manega nahi maanna nahi maanega ya tumhari tarah bhadas nikalta firega
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