Monday, June 04, 2007

उफ़्फ़ ये transliteration tools

हिन्दी लिखने के लिए transliteration tools का उपयोग करने वाले लोग सर्वाधिक मात्रा की गल्तियां करते हैं। इतनी गल्तियां कि सहनी मुश्किल हो जाती हैं। भाषा का ज्ञान कम होना अलग बात है, लेकिन अच्छे भले ज्ञानी द्वारा इस तरह की गल्तियां होना तो ठीक बात नहीं है। यहां तक कि इस नए professional साईट पर भी आप अनेक गल्तियां देखेंगे। पता नहीं लोग इस तरह का अप्रकृतिक तरीका अभी तक क्यों उपयोग में ला रहे हैं। टाईप करने का सीधा सा नियम है कि एक कुञ्जी दबाने से एक अक्षर आना चाहिए, जैसे साधारण अंग्रेज़ी कीबोर्ड में होता है। वही नियम युनिकोड के लिए भी उपयुक्त है। एक कुञ्जी दबाने पर एक युनिकोड अक्षर आना चाहिए। बाकी सब तो ब्राउज़र, operating system आदि का खेल है कि वो विभिन्न युनिकोड अक्षरों के combinations को किस तरह दिखाते हैं। हिन्दी के अनेक संयुक्ताक्षर इस सूची में दिए गए मूल अक्षरों के विभिन्न मिश्रणों से बनते हैं। उदाहरण के लिएः
द्द=द+्+द
द्म=द+्+म
द्य=द+्+य
द्ध=द+्+ध
द्घ=द+्+घ
क्ष=क+्+ष
त्र=त+्+र
श्र=श+्+र
ज्ञ=ज+्+य
ह्म=ह+्+म
ह्य=ह+्+य
ह्व=ह+्+व
इस लिए साधारण कीबोर्ड ही हिन्दी लिखने के लिए उपयुक्त है। इसमें एक कुञ्जी दबाने से एक युनिकोड अक्षर टाईप होता है। इनकी एवं अन्य प्रचलित संयुक्ताक्षरों की सूची भी इसमें दी गई है। इससे आम आदमी को युनिकोड का व्यवहार अधिक गहराई से समझ में आता है, जबकि transliteration tools से व्यक्ति हमेशा भ्रम में रहता है कि श्र जैसे अक्षर एक ही कुञ्जी से टाईप हो जाते हैं तो मतलब वो एक ही अक्षर है, जबकि वो तीन अक्षरों का मिश्रण है (श+्+र)। अब कुछ लोग कहते हैं कि एक अक्षर को टाईप करने के लिए तीन तीन कुञ्जियां क्यों दबाएं, यह कीबोर्ड तो बेकार है। अब उन्हें कैसे समझाएं कि भाई यह युनिकोड ऐसे ही बना है, इसमें आप, हम या कोई भी टूल कुछ नहीं कर सकता। अगर आप भ्रम वाले टूल के साथ जीना चाहते हैं तो जीते रहिए। बाद में जब असली कीबोर्ड आ जाएंगे तब क्या करेंगे आप? तब तो आप श्र जैसे अक्षर एक झटके में नहीं लिख सकेंगे।

इस कीबोर्ड का और एक फ़ायदा ये है कि इसे और किसी भाषा में बदलना बहुत आसान है। केवल युनिकोड नंबर को बदलिए और काम हो गया। उदाहरण के लिए यहाँ देखें।

2 comments:

हरिराम said...

आपका यह उद्देश्य तो बिल्कुल सही है कि एक कुंजी से एक अक्षर ही टाइप होना चाहिए। किन्तु हिन्दी तथा भारतीय भाषाओं के लिए युनिकोड मानक ही त्रुटिपूर्ण हैं, जहाँ आधे अक्षर (उदाहरणार्थ क् ) के लिए दो कुंजिया दबानी पड़ती है, (क्ल=क+halant+ल) जिसके कारण sorting, indexing में काफी समस्याएँ आती हैं।

Shrish said...

सबसे पहले तो यह जानकर खुशी हुई कि आप भी इस विषय पर चर्चा करने हेतु रुचि रखते हैं। आगे से आपसे भी इस बारे संपर्क में रहूँगा।

आपका देवनागरी टाइपराइटर देखा, थोड़े सुधार के बाद वह एक बेहतरीन टाइपराइटर हो सकता है। अभी उसमें मुख्य कमी यह है कि कई कुंजियाँ याद रखनी पड़ती हैं, आजकल प्रचलित ट्रांसलिट्रेशन टूल्स की खूबी ही यही है कि उन्हें सीखने में कोई श्रम नहीं लगता।

हर टाइपिंग विधि की अपनी खूबियाँ और कमियाँ हैं, इस बारे कभी लिखूँगा। मैं कई कीबोर्ड आजमा चुका हूँ, सेमी-फोनेटिक समेत लेकिन फिलहाल फोनेटिक का कोई विकल्प नहीं है जिससे कि नए लोग बिना अभ्यास के टाइप करने लगें।

नो झंझट सटासट विधि के तौर पर फिलहाल फोनेटिक ट्रांसलिट्रेशन ही सबसे उपयुक्त तरीका है। यद्यपि मेरा विचार है कि इसको परिष्कृत कर एक सरलतम कीबोर्ड बनाया जा सकता है।