Sunday, April 16, 2006

मैं छुट्टी से वापस आ गया

एक ही हफ़्ते में ही नारद पर 120 पोस्टें छप गईं, पढ़ने में टैम लगेगा। छुट्टियां अच्छी थीं, परिवार सहित साऊथ इटली तथा सिसली गया था। मौसम यहां से बेहतर था। टोटल रिलैक्स।

Saturday, April 08, 2006

मैं छुट्टी पर जा रिया हूँ

भई मैं एक हफ़्ते की छुट्टी पर जा रिया हूँ, सायद ईमेल देखनी भी नसीब न हो। मेरी याद आए (लगता तो नहीं) तो वेट कर लेना।

Sunday, April 02, 2006

अनुगूंज 18: मेरे जीवन में धर्म का महत्व

Akshargram Anugunj

जार मुझे समझ नहीं आता इसमें डिश्कश करने वाली क्या बात है। धर्म तो जीवन को चलाने के लिऐ अतिआवश्यक है। जैसे बास कहता है 'आज से कंपनी के नियमों का पालन करना ही तुम्हारा धर्म है'। या विदा करते समय माता पिता बेटी को कहते हैं 'आज से पति की आज्ञा का पालन करना ही तुम्हारा धर्म है'। तो धर्म तो एक आदेशों तथा नियमों की सूची है जिससे आपकी ज़िंदगी को दिशा मिलती है। अगर आप किसी भी धर्म का पालन नहीं करेंगे तो आपकी लाईफ़ दिशाहीन रह जाएगी। वो बात अलग है कि ऊपर दिए गए धर्म अब कम पापुलर हैं और सदियों पुराने धर्म अब भी पूरा ज़ोर मार रहे हैं। लेकिन आप खुद भी तो अपना धर्म डिफ़ाईन कर सकते हैं। सिर्फ़ एक नियमों की सूची ही तो बनानी है। लेकिन चाहिए ज़रूर, इसमें कोई शक नहीं। बल्कि अनुगूंज का विषय होना चाहिए था कि आपका धर्म कौन सा है।

इस अनुगूंज से मुझे इन्सपिरेसन मिल रही है एक नया धर्म शटार्ट करने की। इसका नामकरन तो अभी नहीं हुआ है लेकिन थोड़ी व्याख्या कर सकता हूँ। इस धर्म का मुख्य उद्देशय है आपको इस दुनिया में जीने के लिए फ़िट बनाना। आप इस दुनिया में आ ही गए हैं तो ये समझ लीजिए कि आपका मुख्य तौर पर कम्पीटीसन रहेगा इन्सानों के साथ। प्राकृति तथा जानवर आपसे मुकाबला करने लायक नहीं हैं।

सिर्फ़ एक कंडीसन है कि आप किसी को जानी या माली नुक्सान न पहुँचाएं। थोड़ी बहुत मानसिक ठेस एक्सेप्टेबल है। सुबह उठकर आँखें मूंद कर दो मिनट के लिए प्रार्थना करें कि दुनिया में शाँति हो, प्राकृति सलामत रहे, सब खुश हों, सबकी मूल आवश्यकताएं पूरी हों। अब मनोज कुमार जी रोटी कपड़ा और मकान का भासन देते समय चौथी चीज़ यानि नीचे वाली चीज़ को टोटली भूल गए। ये भी मूल आवश्यकताओं में से एक है।

एक और थर्ड पार्टी नियम सम्मिलित किया गया है जो वर्षों पहले मेरे एक मित्र ने बताया था। वो ये कि अगर कोई जानने वाला आपसे मिलने आता है या फ़ोन करता है, तो आपको क्या लगता है कि उसे आपकी शक्ल अच्छी लगती है जो आपको देखे बिना नहीं रह सका? या फिर आपकी मधुर आवाज़ सुने बिना नहीं रह सका? कोई भी अगर आपसे संपर्क करता है तो एक उद्देशय के साथ करता है, भले ही वो आधा घंटा इधर उधर की आलतू फ़ालतू की बातें करता रहे। इस पीछे वाले उद्देशय को समय पर पहचानें तथा बढ़िया जवाब के साथ तैयार रहें।

मेरे पल्ले तो अभी इतना ही है, लेकिन इस नए धर्म का स्पेक्ट्रम बढ़ाने की कोशिश जारी रहेगी। आप भी इस धर्म की स्थापना में हाथ बँटाएं तथा अपनी अपनी टिप्स दें ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस धर्म का पालन करके सफ़ल और खुशहाल ज़िंदगी जी सकें तथा धर्म के महत्व पर कोई प्रशन न उठने पाए।